आज 23 अक्टूबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश सोशल मीडिया और खबरों में टॉप ट्रेंडिंग टॉपिक बना हुआ है. वजह है भारत-चीन सीमा (LAC) पर चल रहा तनाव. ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने पहली बार आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ फेस-ऑफ जारी है. यह तनाव जुलाई 2026 से शुरू हुआ था और BRICS समिट के दौरान भी जारी रहा.
क्या हुआ है?
ITBP डीजी शत्रुजीत कपूर ने अलवर में एक समारोह में कहा, “पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल में कई जगहों पर फेस-ऑफ हुआ और यह अभी भी जारी है.” उन्होंने शौर्य कमांडो यूनिट की तारीफ की, जो ऊंचाई वाले इलाकों में काम करती है.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अपर सुबनसिरी जिले के तक्सिंग सर्कल के आसफिला इलाके में जुलाई के अंत से स्टैंड-ऑफ चल रहा है. चीनी PLA ने भारत की समझ वाली LAC से 6-7 किलोमीटर अंदर ऊंचे स्थान पर तंबू लगाए हैं. नियमित पेट्रोलिंग के दौरान आमना-सामना हुआ, दोनों पक्ष वापस लौटे, लेकिन PLA ने बड़ी संख्या में लौटकर तंबू गाड़ दिए. भारत ने भी अपनी तैनाती बढ़ाई है. सितंबर में वाचा-दमाई बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर कॉर्प्स कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी.
भारत भी अपनी तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ रहा है. ITBP ड्रोन प्लाटून, भूमिगत बंकर और स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग के जरिए तैयारी बढ़ा रही है.
कौन क्या बहस कर रहा है?
कांग्रेस: इस खबर के बाहर आते ही कांग्रेस सरकार पर हमलावर हो गई है. जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार पर “बहरे सन्नाटे” का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि ITBP चीफ ने फेस-ऑफ की तारीफ की, लेकिन PM और उनके इस्टैब्लिशमेंट की तरफ से चुप्पी है. उन्होंने गलवान घटना का जिक्र करते हुए “कैलिब्रेटेड रियायतों” का आरोप लगाया और चीन द्वारा जगहों के नाम बदलने व बड़े डैम बनाने का मुद्दा भी उठाया.
सरकार और भाजपा: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अरुणाचल में कोई नया चीनी कब्जा नहीं हुआ है. स्थानीय लोगों की चरागाह क्षेत्रों तक पहुंच को लेकर चिंता जायज है, लेकिन सीमा पूरी तरह demarcate नहीं होने से perception का फर्क है. भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि सीमा “डायनामिक” जगह है, स्थानीय स्तर पर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, इससे युद्ध जैसी स्थिति नहीं बनती.
स्थानीय स्तर पर पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) ने जुलाई में पेट्रोलिंग पॉइंट्स ब्लॉक होने का आरोप लगाया था, जिसे राज्य सरकार ने खारिज किया.
मौजूदा स्थिति क्या है?
तनाव जारी है, लेकिन बड़े स्तर का संघर्ष नहीं चल रहा. दोनों पक्ष सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत कर रहे हैं. ITBP और भारतीय सेना अलर्ट पर हैं. अरुणाचल को भारत अपना अविभाज्य अंग मानता है. चीन इसे “जांगनान” या दक्षिणी तिब्बत कहता है और अपना हिस्सा होने का दावा करता है.
इसके अलावा राज्य में सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट (बड़े डैम) के विरोध में भी प्रदर्शन और बंद हो रहे हैं, लेकिन मुख्य ट्रेंडिंग मुद्दा सीमा तनाव ही है.
थोड़ा इतिहास समझें: मैकमोहन लाइन से 1962 तक
अरुणाचल प्रदेश (पहले NEFA) भारत-चीन सीमा विवाद का पूर्वी सेक्टर है.
- 1914: सिमला कन्वेंशन में ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच मैकमोहन लाइन खींची गई. चीन ने इसे स्वीकार नहीं किया. भारत इसे आधिकारिक सीमा मानता है.
- 1950 के दशक: चीन के तिब्बत पर कब्जा करने के बाद दावे तेज हुए.
- 1959: लॉन्गजू में पहला बड़ा झड़प.
- 1962: भारत-चीन युद्ध. चीन अरुणाचल में आगे बढ़ा, लेकिन एकतरफा युद्धविराम के बाद पीछे हट गया.
- बाद में 1993 के बॉर्डर पीस एंड ट्रैंक्विलिटी एग्रीमेंट और अन्य समझौतों से LAC को मैनेज करने की कोशिश हुई. 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पूर्वी सेक्टर में भी सतर्कता बढ़ी.



