इजराइल (Israel)…. फिलिस्तीन (Palestine)…दो नाम जो खबरों में छाए हुए हैं……पूरी दुनिया इनके बीच की दुश्मनी की भयानक जंग देख रही है. अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे इजराइल के यहूदी (Jewish) कौन हैं… चलिए जानते हैं हिस्ट्री की मिस्ट्री में-
लगभग चार हजार वर्ष पूर्व यहुदी धर्म का इतिहास मिस्र के नील नदी से लेकर वर्तमान इराक़ के दजला-फरात नदी के बीच आरंभ हुआ। इस धर्म की शुरुआत होती है येरूशलम से. वही येरूशलम जो यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्म की पवित्र जगहों में से एक है. इस धर्म की शुरुआत पैगंबर अब्राहम ने की थी. अब्राहम को ईसाई और मुस्लिम भी ईश्वर का दूत कहते हैं. अब्राहम के बेटे का नाम आईजैक और एक पोते का नाम याकूब (जैकब) था. याकूब का दूसरा नाम इस्राएल था. याकूब के 12 बेटे और एक बेटी थी. इन 12 बेटों ने 12 यहूदी कबीले बनाए. याकूब ने इन यहूदियों को इकट्ठा कर इस्राएल नाम का एक राज्य बनाया. याकूब के एक बेटे का नाम यहूदा था. उनके वंशजों को यहूदी कहा गया. इनकी भाषा हिब्रू थी.
धर्मग्रंथ तोरात के अनुसार अब्राहम लगभग 2000 ई॰पू॰ अकीदियन साम्राज्य के ऊर प्रदेश में अपने इब्रानी कबीले के साथ रहा करते थे. जहाँ प्रचलित मूर्तिपूजा से व्यथित होकर इन्होंने ईश्वर की खोज में अपने कबीले के साथ एक लम्बी यात्रा शुरू की. यर्दन नदी की तराई के प्रदेश में पहुँचने के बाद पहले इज़राएली प्रदेश की नींव पड़ी. यहूदी मान्यता के अनुसार बाद में कनान प्रदेश में भीषण अकाल पड़ने के कारण इब्रानियों को सम्पन्न देश मिस्र में जाकर शरण लेनी पड़ी. मिस्र में कई वर्षों बाद इज़राएलियों को गुलाम बना लिया गया. फिर तीन-चार सौ सालों के बाद हजरत मूसा का जन्म संभवत: ईसा पूर्व 1392 को मिस्र में हुआ था. उस काल में मिस्र में फेरोन का शासन था. फेरोन ने सभी इजरायली नवजातों को मारने का आदेश दिया था ताकि वे आगे चलके उन्हें हरा न पाएं, एक हिब्रु मां ने अपने बच्चे की जान बचाने के लिए उसे टोकरी में डाल दिया था जो संयोग से फेरोन की बेटी को मिल गया फिर उसी ने उस बच्चे को पालकर बड़ा किया. यह बच्चा ही थे पैगंबर मूसा जिन्होंने बाद में अपनी असलियत जानने पर यहूदियों को प्रताड़ना से बचाकर वापस इजराइल में बसाया. बाद में यहूदी राज्य में साउल, इशबाल, डेविड और सोलोमन जैसे प्रसिद्ध राजा हुए.
इजरायल के राजा किंग सोलोमन (King Solomon ने यहां एक भव्य मंदिर बनवाया, जिसे यहूदी फर्स्ट टेंपल कहते हैं. लेकिन 931 ईसा पूर्व में सोलोमन के बाद इस राज्य का धीरे-धीरे पतन होने लगा. संयुक्त इजराइल दो हिस्सों में बंटकर इजराइल और यूदा में बंट गया. 700 ईसा पूर्व में असीरियाई साम्राज्य ने येरूशलम पर हमला किया. इस हमले के बाद यहूदियों के 10 कबीले तितर-बितर हो गए. सोलोमन के बनाए फर्स्ट टेम्पल को बाद में बेबिलोनियन लोगों ने तोड़ दिया. फिर करीब पांच सौ साल बाद 516 ईसापूर्व में यहूदियों ने दोबारा इसी जगह पर एक और मंदिर बनाया. वो मंदिर कहलाया- सेकेंड टेम्पल. यहां यहूदी नियमित पूजा करने आया करते. ये मंदिर 600 साल सही सलामत रहा. फिर सन् 70 में रोमन साम्राज्य के हमले के बाद सारे यहूदी दुनियाभर में इधर-उधर जाकर बस गए. इस घटना को एक्जोडस कहा जाता है. इस हमले में उस मंदिर को भी तोड़ दिया गया. इस मंदिर की एक दीवार बची थी जो आज भी यहूदियों के लिए पवित्र तीर्थ मानी जाती है. इसे वेस्टर्न वॉल भी कहा जाता है.
आज जिस अल-अक्सा मस्जिद की चर्चा है वह मक्का और मदीना के बाद इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल है. मुसलमानों के लिए यह स्थल ‘अल-हराम अल शरीफ’ के नाम से मशहूर है. जबकि ‘टेंपल माउंट’ के नाम से मशहूर यह जगह यहूदियों के लिए पवित्र स्थल है. यहूदियों के लिए सबसे पवित्र स्थल ‘डोम ऑफ द रॉक’ इसी जगह स्थित है. यहूदी अल-अक्सा मस्जिद की वेस्टर्न वॉल को अपने यहूदी मंदिर का आखिरी अवशेष मानते हैं. जबकि मुस्लिम समुदाय इस दीवार के अल बराक की दीवार होने का दावा करते हैं.
यहूदियों का मानना है कि धरती पर पहला इंसान आदम हैं जिन्हें बनाने के लिए ईश्वर ने यहां की मिट्टी उठाई थी. इसके साथ ही दूसरी मान्यता के मुताबिक यहूदियों के पहले पैगंबर अब्राहम को ईश्वर ने आदेश दिया कि वह अपने प्रिय बेटे इसहाक की बलि दें. इसके लिए अब्राहम इसाहक को लेकर ईश्वर की बताई जगह पर पहुंचे. लेकिन बलि देने से पहले ही ईश्वर ने एक देवदूत को भेजा और अब्राहम की श्रद्धा से खुश होकर इसहाक को बख्शने को कहा. इसकी जगह ईश्वर ने वहां मौजूद एक भेड़ की बलि चढ़ाने को कहा. यहूदियों का मानना है कि यह घटना उसी टेंपल माउंट पर हुई. लंबे समय तक यहां ईसाइयों का कब्जा रहा. 10वीं सदी के बाद यहां कब्जे को लेकर मुस्लिमों और ईसाइयों में युद्ध होता रहा. ईसाई मानते हैं कि यरूशलम में ही ईसा मसीह ने अपना उपदेश दिया और यहीं उन्हें सूली पर चढ़ाया गया और इसी शहर में वह वापस जीवित हो गए.
खैर, एक्जोडस के बाद यहूदी पूरी दुनिया में फैल गए. इसके बाद दुनिया में एक शब्द अस्तित्व में आया जिसे एंटी सेमिटिज्म कहा जाता है. इसका मतलब है हिब्रू भाषा बोलने वाले लोगों यानी यहूदियों के प्रति दुर्भावना. दुनिया में यहूदियों को लेकर एक वहम फैला कि यहूदी दुनिया की सबसे चालाक कौम है और ये किसी को भी धोखा दे सकते हैं. एक्जोडस के बाद अधिकांश यहूदी यूरोप और अमेरिका में बस गए. एंटी सेमिटिज्म के चलते कई देशों में यहूदियों को अपनी पहचान सार्वजनिक कर रखनी होती थी. कई यूरोपीय देशों की सेनाओं में लड़ने वाले यहूदियों को अपनी वर्दी पर एक सितारा लगाकर रखना होता था. इस सितारे को डेविड का सितारा कहा जाता है. इस सितारे से यहूदियों की पहचान की जाती थी. यहूदियों को अपनी पहचान छिपाने या गलत बताने पर सजा का भी प्रावधान था. बाद में अलग जगहों पर रहने वाले यहूदियों का प्रभाव बढ़ा.
1914 में प्रथम विश्वयुद्ध के बीच 2 नवंबर 1917 को ब्रिटेन और यहूदियों के बीच बालफोर समझौता हुआ. इस के मुताबिक अगर ब्रिटेन युद्ध में ऑटोमन साम्राज्य को हरा देता तो फलीस्तीन के इलाके में यहूदियों के लिए एक स्वतंत्र देश दिए जाने का वादा किया गया. इसके बाद आलिया में तेजी आ गई. आलिया यहूदियों का दूसरे देशों से येरूशलम की तरफ पलायन करने को कहा जाता है. दुनियाभर के यहूदी अपने देशों को छोड़कर फलीस्तीनी इलाकों में बसने लगे. लेकिन ब्रितानी सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया. प्रथम विश्वयुद्ध खत्म होने के अगले 20 साल तक यह समझौता लागू नहीं हो सका और द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हो गया. दूसरे विश्वयुद्ध ने यहूदी इतिहास को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया. उस समय जर्मनी के मुखिया अडोल्फ हिटलर ने एंटी सेमिटिज्म का सबसे क्रूर रूप दिखाया. करीब 60 लाख यहूदियों की योजनाबद्ध तरीके से हत्या कर दी गई. जर्मनी और आस पास के देशों में कैंप लगाकर यहूदियों को मारा गया.
विश्वयुद्ध खत्म होने पर जब दुनियाभर में ये बात फैली तो पूरी दुनिया की संवेदना यहूदियों के साथ हो गई. 1947 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने यहूदियों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि फिलिस्तीन के दो हिस्से किए जाएं. एक हिस्सा यहूदियों को दिया जाए. दूसरा हिस्सा मुस्लिमों को दे दिया जाए. येरूशलम को एक अंतरराष्ट्रीय शहर रखा जाए क्योंकि यहां यहूदी, मुस्लिम और ईसाई तीनों धर्मों के धर्मस्थल हैं. यहूदियों को यह योजना पसंद आ गई. लेकिन मुस्लिम इसके लिए तैयार नहीं हुए. अरब देशों ने इस बंटवारे को फिलिस्तीन के मुस्लिमों के साथ अन्याय बताया. अरब देशों ने कहा कि मुस्लिमों ने यहूदियों पर कभी अत्याचार नहीं किया है. यहूदियों पर हुए अत्याचारों के लिए यूरोपीय देश और ईसाई जिम्मेदार हैं. ऐसे में अगर यहूदियों को अलग देश देना है तो यूरोप में दिया जाना चाहिए.
इसी बंटवारे के साथ शुरू हुआ इजराइल फिलिस्तीन विवाद जो आज तक जारी है. इजराइल ने फिलिस्तीनी संगठनों और अरब देशों के साथ कई लड़ाईयां लड़ीं. इजराइल सैन्य युद्ध में अरब देशों से अब तक हारा नहीं है. इजराइल और अरब देशों के बीच में हुई लड़ाइयों में इजराइल ने और भी जमीन हथिया ली. फिलहाल येरूशलम के एक बड़े हिस्से पर इजराइल का कब्जा हो चुका है. येरूशलम में इजराइल ने एक दीवार बना ली है. ये दीवार येरूशलम को फिलिस्तीन से अलग करती है. इजराइल ने येरूशलम को अपनी राजधानी घोषित कर दिया.
