आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से SonyLIV पर हाल ही में रिलीज़ हुई वेब सीरीज़ “महारानी 4” देखने की अपील की है. उन्होंने लिखा है, “SonyLIV की महारानी 4 वेब सीरीज़ आपको ज़रूर देखनी चाहिए. यह आज की पॉलिटिक्स की गंदी सच्चाई बयां करती है. टीम ने जिस बहादुरी से इसे दिखाया है उसके लिए शाबाशी.”
अब केजरीवाल की इस पोस्ट को लोग सिरियसली न लेकर मजाक उड़ा रहे हैं. एक यूज़र ने लिखा है, “दिल्ली वालों ने ऐसा भेजा है पंजाब कि कोई काम नहीं रह गया…फिल्म का रिव्यू देना पड़ रहा है.” किसी ने लिखा, “हम बेरोज़गार केजरीवाल के उस सुनहरे दौर में वापस आ गए हैं जब वे शो और फिल्मों की समीक्षा करते थे. हमें आपकी बहुत याद आई सर!”
पर ऐसा क्या है Huma Quresh की महारानी 4 वेब सीरीज़ में..जिसने अरविंद केजरीवाल को ट्वीट करने पर मजबूर किया? वहज है सिरीज में दिखाए गए राजनीति के दांव-पेंच जिसे केजरीवाल मौजूदा सरकार से जोड़ रहे हैं.
अगर कहानी की बात करें तो यह सिरीज रानी भारती (हुमा कुरैशी) की राजनीतिक यात्रा को बिहार की सरहदों से निकालकर दिल्ली के गलियारों तक ले जाती है. कहानी की शुरुआत दिल्ली के भव्य गलियारों से होती है. गठबंधन सरकार चला रहे प्रधानमंत्री सुधाकर श्रीनिवास जोशी (विपिन शर्मा) का एक प्रमुख सहयोगी उसकी सरकार से समर्थन वापस ले लेता है, जिससे उसका शासन डगमगा जाता है. अपनी सत्ता बचाने के लिए बेताब, वह क्षेत्रीय नेताओं की ओर रुख करता है, जिनमें बिहार की मुख्यमंत्री रानी भारती भी शामिल हैं.
अब रानी सिर्फ बिहार की मुख्यमंत्री नहीं रहना चाहतीं – वो देश की प्रधानमंत्री बनने की होड़ में हैं. गवर्नर गोवर्धन दास की हत्या का इल्जाम लगते ही रानी को अपना सीएम पद छोड़ना पड़ता है. लेकिन वो कहां हार मानने वाली हैं? वो अपनी बेटी रोशनी (श्वेता बसु प्रसाद) को नया सीएम बनाती हैं – यह एक ऐसा फैसला होता है जो उनके बेटे जय (शार्दुल भारद्वाज) को नाराज कर देता है और पार्टी में नेपोटिज्म के आरोपों की बाढ़ आ जाती है.
अब असली बैटल दिल्ली में शुरू होती है. रानी का मुकाबला है प्रधानमंत्री सुधाकर श्रीनिवास जोशी (विपिन शर्मा) से, जो एक चालाक, सत्ता-लिप्सित नेता हैं. जोशी रानी को तोड़ने के लिए हर हथकंडा अपनाता है – गठबंधन तोड़ना, सीबीआई रेड्स, गुप्त डील्स, और यहां तक कि पर्सनल अटैक्स भी करता है. रानी का परिवार भी टूटने की कगार पर है: जय की महत्वाकांक्षा, रोशनी की आदर्शवादिता, और छोटे बेटे सूर्या (दर्शील सफारी) की मासूमियत सब कुछ दांव पर है.
बीच में आती हैं कावरि जैसी दोस्त, जो वफादारी और धोखे की लाइन पर चलती हैं. कहानी के क्लाइमेक्स में जब रानी की जीत करीब लग रही होती है, एक फैमिली ट्रेजडी (जय की मौत का संदेह) सब कुछ उलट देती है. जोशी अपनी प्रेमिका गायत्री से शादी कर सत्ता मजबूत करते हैं, उधर, रानी बदले की कसम खाती है. एंडिंग एक क्लिफहैंगर है – रानी हार जाती हैं, लेकिन ये हार बदले की आग जला देती है.
महारानी सीजन 4 एक डेजी ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ है – बिहार की मिट्टी से दिल्ली की सियासत तक, जहां हर सीट पर खून बहता है. रानी अब साधारण गृहिणी नहीं, एक शेरनी हैं जो आंसू और आग दोनों बरसाती है. उसका “सिंहासन खींच लेंगे आपका” डायलॉग अभी भी रोंगटे खड़े कर देता है. वो गुस्सा करती है तो डर लगता है, रोती है तो दिल पिघल जाता है.
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