फ्री रेडिकल को समझ लो तो नहीं आएगा बुढ़ापा

फ्री रेडिकल को समझ लो तो नहीं आएगा बुढ़ापा

चेहरे पर बढ़ती झुर्रियां, घटती ऊर्जा और थकान… ये आपकी और हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. बुढ़ापा कोई ‘अचानक’ आने वाली चीज़ नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर के अंदर चल रहे एक लगातार ‘युद्ध’ का परिणाम है. यह युद्ध हो रहा है आपके शरीर की अरबों कोशिकाओं में, जहां कुछ ‘अशांत अणु’ (फ्री रेडिकल) हर पल आपके डीएनए और युवा दिखने की क्षमता पर हमला कर रहे हैं. इस हमले से लड़ने और जवान बने रहने के लिए हमें चाहिए एक ‘सुपर हीरो’ सेना. आइए जानते हैं कि कौन-से ‘सुपर हीरो’ आपकी ढाल बनकर आपको हमेशा एनर्जेटिक और यंग रख सकते हैं.

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे शरीर के अंदर हर पल क्या चल रहा है? दरअसल हमारा शरीर किसी बड़े शहर जैसा है जहां लाखों छोटी-छोटी ‘फैक्ट्रियां’ (कोशिकाएं) चौबीसों घंटे काम कर रही हैं. इन फैक्ट्रियों में एक छोटी सी गड़बड़ी होती है, जिसे हम फ्री रेडिकल कहते हैं.

😈 फ्री रेडिकल क्‍या हैं? (शरीर के ‘बैड बॉयज़’)

फ्री रेडिकल को आप शरीर के अंदर के अशांत और गुस्सैल’ अणु (Molecules) समझ सकते हैं.

  • हर अणु स्थिर (Stable) रहना चाहता है. स्थिरता के लिए उसके बाहरी ऑर्बिट (Outer Orbit) में इलेक्ट्रॉन हमेशा जोड़े (Pairs) में होते हैं.
  • जब अणु से उसका एक इलेक्ट्रॉन छिन जाता है (या वह इलेक्ट्रॉन जोड़े में नहीं रहता), तो वह अकेला और बेचैन हो जाता है.
  • परिणामस्‍वरूप यही अकेला, अयुग्मित (Unpaired) इलेक्ट्रॉन वाला अणु फ्री रेडिकल कहलाता है. यह बेहद अस्थिर (Highly Unstable) और प्रतिक्रियाशील (Reactive) होता है.
  • बेचैन होने के कारण किसी भी कीमत पर दूसरे अणुओं से इलेक्ट्रॉन छीनकर खुद को स्थिर करना इन फ्री रेडिकल का मिशन बन जाता है. यह प्रक्रिया ऑक्सीडेशन (Oxidation) कहलाती है.

🏭 यह पैदा कहां से होते हैं?

फ्री रेडिकल कोई बाहर का दुश्मन नहीं है. ये मुख्य रूप से दो कारणों से पैदा होते हैं:

  1. सामान्य मेटाबॉलिज्म (Metabolism): जब हमारा शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलता है, तो यह एक स्वाभाविक उप-उत्पाद (By-product) के रूप में पैदा होते हैं.
  2. बाहरी हमले: प्रदूषण, सिगरेट का धुआं, अत्यधिक धूप (UV किरणें), तनाव, और अस्वस्थ खान-पान इनकी संख्या को कई गुना बढ़ा देता है.

🥊 ये हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करते हैं?

जब ये ‘गुस्सैल अणु’ दूसरे अणुओं से इलेक्ट्रॉन छीनते हैं, तो यह एक चेन रिएक्शन (Chain Reaction) शुरू कर देते हैं.

  • फ्री रेडिकल एक स्वस्थ अणु से इलेक्ट्रॉन छीनता है.
  • इलेक्ट्रॉन खोने वाला स्वस्थ अणु अब खुद एक फ्री रेडिकल बन जाता है.
  • और यह नया फ्री रेडिकल, आगे जाकर किसी और अणु पर हमला करता है.

यह ‘तोड़फोड़’ शरीर के तीन सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंचाती है:

  1. DNA (डीएनए): यह हमारी कोशिकाओं का ‘ब्लूप्रिंट’ है. इसे नुकसान पहुंचने से कोशिकाएं ठीक से काम नहीं कर पातीं, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
  2. कोशिका झिल्ली (Cell Membrane): यह कोशिका की बाहरी दीवार है. इसे नुकसान पहुंचने से कोशिकाएं कमज़ोर हो जाती हैं और जल्दी मर जाती हैं.
  3. प्रोटीन (Proteins): फ्री रेडिकल इन्हें विकृत (Denature) कर देते हैं, जिससे शरीर के काम करने की क्षमता कम हो जाती है.

इस नुकसान को वैज्ञानिक भाषा में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress) कहते हैं. यह लगभग हर गंभीर बीमारी की जड़ है, जैसे- हृदय रोग, मधुमेह (Diabetes), और यहां तक कि अल्जाइमर.

🦸 एंटी-ऑक्सीडेंट: हमारे ‘सुपर हीरोज़’

अब मिलते हैं हमारे रक्षक दल से – एंटी-ऑक्सीडेंट! ये वो ‘सुपर हीरो’ हैं जो फ्री रेडिकल के हमले को नाकाम करते हैं.

  • रोल क्या है: एंटी-ऑक्सीडेंट एक ऐसे ‘डोनर’ की तरह होते हैं जो स्वेच्छा से फ्री रेडिकल को अपना एक इलेक्ट्रॉन दान कर देते हैं.
  • कमाल की बात: इलेक्ट्रॉन देने के बाद भी, एंटी-ऑक्सीडेंट खुद फ्री रेडिकल नहीं बनते हैं और स्थिर बने रहते हैं (या खुद को आसानी से स्थिर कर लेते हैं).
  • असर: जैसे ही फ्री रेडिकल को इलेक्ट्रॉन मिलता है, वह तुरंत शांत और स्थिर हो जाता है. यह चेन रिएक्शन वहीं पर रुक जाती है.

🍎 एंटी-ऑक्सीडेंट कहां मिलते हैं?

एंटी-ऑक्सीडेंट मुख्य रूप से फलों, सब्ज़ियों और साबुत अनाज में पाए जाते हैं.

  • विटामिन C और E: सबसे प्रसिद्ध एंटी-ऑक्सीडेंट हैं.
  • बीटा-कैरोटीन, लाइकोपीन और सेलेनियम: अन्य शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट.
  • ये सब मिलकर शरीर की प्राकृतिक ‘सफाई’ और ‘मरम्मत’ प्रणाली को मज़बूत करते हैं.

🕰️ बुढ़ापे और जवान बने रहने का कनेक्शन

फ्री रेडिकल और एंटी-ऑक्सीडेंट का खेल ही तय करता है कि हम कितनी जल्दी या धीरे-धीरे बूढ़े होंगे.

  1. फ्री रेडिकल यानी तेज़ी से बुढ़ापा: जब शरीर में फ्री रेडिकल की संख्या बहुत अधिक हो जाती है (ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस), तो वे लगातार कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते रहते हैं. यह नुकसान जमा होता जाता है, जिससे हमारी कोशिकाएं और ऊतक (Tissues) कमज़ोर पड़ जाते हैं. हमारी त्वचा पर झुर्रियां (Wrinkles) आना, याददाश्त कम होना, और शरीर का साथ छोड़ना, इसी ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के जमाव का परिणाम है. यह एक तरह से ‘तेज़ जंग’ लगने जैसा है.
  2. एंटी-ऑक्सीडेंट = धीमी उम्र (Younger You): एंटी-ऑक्सीडेंट इस ‘जंग लगने’ की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं. वे क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करते हैं और नई कोशिकाओं को टूटने से बचाते हैं. इसका सीधा मतलब है कि आपकी कोशिकाएं अधिक समय तक स्वस्थ, सक्रिय और जवान बनी रहती हैं.

तो यदि आप जवान बने रहना चाहते हैं और स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं, तो आपको अपने शरीर में फ्री रेडिकल के हमले और एंटी-ऑक्सीडेंट के बचाव के बीच एक बेहतर संतुलन बनाए रखना होगा. यह संतुलन मुख्य रूप से सही आहार, अच्छी नींद और तनाव-मुक्त जीवन से आता है.

🍒 एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर 5 सुपर फल (Dietary Superheroes)

एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर ये 5 फल न केवल फ्री रेडिकल्स को बेअसर करते हैं, बल्कि आपकी त्वचा को भी जवान बनाए रखने में मदद करते हैं:

क्रम संख्याफल का नामयह क्यों खास है?
1जामुन (Berries)ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, रास्पबेरी, और ब्लैकबेरी, ये सभी एंथोसायनिन (Anthocyanins) नामक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो याददाश्त को भी तेज़ करते हैं और कोशिकाओं की सुरक्षा करते हैं.
2अनार (Pomegranate)यह पुनिकलैजिंस (Punicalagins) का एक बेहतरीन स्रोत है. यह खास तरह का एंटी-ऑक्सीडेंट सूजन को कम करने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अद्भुत काम करता है.
3लाल अंगूर (Red Grapes)इनमें रेस्वेराट्रोल (Resveratrol) नामक कंपाउंड होता है, जो बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने (एंटी-एजिंग) के लिए बहुत प्रसिद्ध है. यह विशेष रूप से छिलके में पाया जाता है.
4कीवी (Kiwi)विटामिन C का एक पावरहाउस है, जो कि एक बेहद शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट है. यह कोलेजन (Collagen) के उत्पादन को बढ़ावा देता है, जिससे आपकी त्वचा टाइट और जवान बनी रहती है.
5चेरी (Cherries)ये न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि इनमें भी एंथोसायनिन होता है. ये खासकर रात की अच्छी नींद लेने (मेलाटोनिन के कारण) और मांसपेशियों की रिकवरी में मदद करते हैं, जिससे शरीर का ‘ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस’ कम होता है.

सलाह: इन फलों को सीधे खाएँ, जूस बनाकर नहीं. सीधे खाने से आपको फाइबर भी मिलता है, जो एंटी-ऑक्सीडेंट के अवशोषण (Absorption) में मदद करता है.

स्रोत: https://www.nature.com/articles/s41420-024-02278-8

pmc.ncbi.nlm.nih.gov

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