बाबी यार की कहानी, जिसे राख भी मिटा न सकी..
कीव शहर. साल 1941. आसमान पर जर्मन फ़ौज के क्रूर काले साए मंडरा रहे थे. शहर के यहूदी समुदाय में एक अजीब सी फुसफुसाहट थी. दीवारें पोस्टर और आदेशों से पटी पड़ी थीं. आदेश साफ़ था: “सभी यहूदी, अपने ज़रूरी सामान और गरम कपड़े लेकर मंगलवार की सुबह 8 बजे निश्चित स्थानों पर इकट्ठा हो…
