कल्पना कीजिए कि आपने एक टाइम मशीन बनाई और आप 70 साल पीछे चले गए. वहां आपकी मुलाक़ात अपने दादाजी से उस वक्त हुई जब वे कुंवारे थे. किसी हादसे या गलती से आपकी वजह से उनकी जान चली जाती है.
अब ठहरिए और सोचिए:
अगर आपके दादाजी उस समय नहीं रहे, तो आपके पिता का जन्म नहीं होगा.
अगर आपके पिता नहीं होंगे, तो आपका अस्तित्व ही नहीं होगा.
और अगर आप कभी पैदा ही नहीं हुए… तो फिर टाइम मशीन बनाकर पीछे कौन गया?
इसी को भौतिक विज्ञान और दर्शनशास्त्र की दुनिया में ग्रैंडफादर पैराडॉक्स (Grandfather Paradox) कहा जाता है. यह वह पहेली है जिसने आइंस्टीन से लेकर स्टीफन हॉकिंग तक को सोचने पर मजबूर किया.
भौतिक विज्ञान इस पहेली को कैसे सुलझाता है?
वैज्ञानिकों ने समय की इस विरोधाभासी उलझन को समझाने के लिए तीन प्रमुख सिद्धांत दिए हैं:
1. नोविकोव का आत्म-संगति नियम (Timeline Self-Consistency)
रूसी भौतिक विज्ञानी इगोर नोविकोव ने प्रस्ताव दिया कि अतीत पहले से तय (Fixed) है. यदि आप अतीत में जाते हैं, तो आप वही काम करेंगे जो पहले से उस इतिहास का हिस्सा बन चुका था.
यानी, आप चाहे जितनी कोशिश कर लें, आप अपने दादाजी को नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे. या तो आपकी बंदूक जाम हो जाएगी, या आप किसी गलत पते पर पहुंच जाएंगे. भौतिकी के नियम आपको इतिहास बदलने की इजाजत ही नहीं देंगे.
2. मल्टीवर्स या मेनी-वर्ल्ड्स इंटरप्रिटेशन (Many-Worlds Theory)
क्वांटम फिजिक्स का यह सबसे रोमांचक मॉडल है. वैज्ञानिक ह्यूग एवरेट के अनुसार, जैसे ही आप अतीत में जाकर कोई बदलाव करते हैं, ब्रह्मांड दो समानांतर शाखाओं (Parallel Universes) में बंट जाता है:
- टाइमलाइन A: जहां से आप आए थे, वहां आपके दादाजी जीवित हैं और आपका अस्तित्व सुरक्षित है.
- टाइमलाइन B: वह नया ब्रह्मांड जहां आपके दादाजी की मृत्यु हो गई, और उस टाइमलाइन में आपका कोई वजूद नहीं होगा.
सीधे शब्दों में कहें तो आप अपने मूल अतीत को नहीं बदल रहे, बल्कि एक नया समानांतर ब्रह्मांड बना रहे हैं.
3. क्रोनोलॉजी प्रोटेक्शन कंजेक्चर (स्टीफन हॉकिंग का विचार)
प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का मानना था कि प्रकृति खुद को पैराडॉक्स से बचाने के लिए कोई न कोई भौतिक रुकावट खड़ी कर देती है। उनके अनुसार, प्रकृति का नियम समय में पीछे जाने की अनुमति ही नहीं देता ताकि इतिहास सुरक्षित रहे. इसे उन्होंने ‘क्रोनोलॉजी प्रोटेक्शन’ कहा था.



