‘द हम’ (The Hum): वो गूंज, जिसने लोगों को पागल कर दिया

‘द हम’ (The Hum): वो गूंज, जिसने लोगों को पागल कर दिया

रात के सन्नाटे में जब पूरी दुनिया सो रही होती है, कल्पना कीजिए कि आपके कानों में अचानक एक आवाज़ गूंजने लगे.

यह कोई सीटी या घंटी की आवाज़ नहीं है. यह किसी दूर खड़े डीज़ल ट्रक के इंजन के लगातार आइडल (Idle) चलने जैसी भारी, कम फ्रीक्वेंसी (Low-frequency) वाली मद्धिम गूंज है—हम्मम्मम्म…

आप उठते हैं, खिड़की खोलते हैं—सड़क खाली है. आप मेन स्विच से घर की सारी बिजली बंद कर देते हैं—आवाज़ फिर भी बंद नहीं होती. आप कानों में रुई ठूंस लेते हैं—आवाज़ और तेज़ हो जाती है, मानो वह बाहर से नहीं, आपकी खोपड़ी के भीतर से आ रही हो.

और सबसे डरावनी बात? आपके बगल में सोया आपका साथी सुकून से सो रहा है, क्योंकि उसे कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा!

इसे विज्ञान की दुनिया में कहा जाता है—‘द हम’ (The Hum) की गूंज.

ताओस से ब्रिस्टल तक: दुनिया भर में दर्ज खौफ

1970 के दशक में इंग्लैंड के ब्रिस्टल शहर से पहली बार सैकड़ों लोगों ने इस अजीब आवाज़ की शिकायत की. इसके बाद 1990 के दशक में अमेरिका के न्यू मैक्सिको स्थित ‘ताओस’ (Taos) शहर में इस गूंज ने ऐसा आतंक मचाया कि अमेरिकी कांग्रेस को वैज्ञानिकों की एक उच्चस्तरीय जांच टीम बैठानी पड़ी.

वहां रहने वाली केवल 2% से 5% आबादी ही इसे सुन पा रही थी. जो लोग इसे सुनते थे, वे अनिद्रा (Insomnia), डिप्रेशन, नाक से खून बहने और सिरदर्द के शिकार होने लगे. कई लोगों ने इस असहनीय गूंज से तंग आकर आत्महत्या तक कर ली.

क्या कहता है विज्ञान? 4 प्रमुख थ्योरीज

दशकों की रिसर्च के बाद भी वैज्ञानिक किसी एक नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन चार प्रमुख परिकल्पनाएं सामने आई हैं:

1. समुद्र की विशाल लहरों की टक्कर (Ocean Microseisms)

भूभौतिकीविदों (Geophysicists) का मानना है कि समुद्र की गहरी लहरें जब महाद्वीपीय ढलानों और एक-दूसरे से टकराती हैं, तो वे पृथ्वी की पपड़ी में बेहद धीमी आवृत्ति (Infrasound – 10 से 50 हर्ट्ज़) की कंपन पैदा करती हैं. कुछ अति-संवेदनशील मानव कान इस भूगर्भीय कंपन को एक लगातार गूंज के रूप में ‘डिकोड’ कर लेते हैं.

2. टैकाइटिस (Tinnitus) का अनोखा रूप?

डॉक्टरों ने शुरुआत में इसे कान की बीमारी ‘टिनिटस’ माना. लेकिन मेडिकल जांच में सामने आया कि ‘हम’ सुनने वाले लोगों की श्रवण क्षमता सामान्य थी, और वे बाहर किसी शांत प्राकृतिक जगह या जंगल में जाने पर भी इस आवाज़ को महसूस कर रहे थे.

3. सैन्य ट्रांसमीटर (VLF Transmitters)

एक थ्योरी यह भी है कि दुनिया भर की नौसेनाएं गहरे समुद्र में तैरती परमाणु पनडुब्बियों से संपर्क साधने के लिए Very Low Frequency (VLF) रेडियो तरंगों का उपयोग करती हैं. ये तरंगें पृथ्वी के आर-पार जा सकती हैं, और कुछ वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह मानवीय तंत्रिका तंत्र (Nervous system) में विद्युत-चुंबकीय गूंज पैदा कर सकती हैं.

4. पृथ्वी का अपना ‘गीत’ (Earth’s Hum)

1998 में वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि हमारी पृथ्वी लगातार एक अत्यंत सूक्ष्म ध्वनि पर स्पंदित (Vibrate) होती रहती है. क्या ‘द हम’ पृथ्वी के अपने भूगर्भीय दिल की धड़कन है, जिसे प्रकृति ने इंसानों से छिपाकर रखा था?

आज भी दुनिया के अलग-अलग कोनों से लोग एक ऑनलाइन ‘वर्ल्ड हम मैप’ पर अपनी शिकायतें दर्ज कराते हैं. यह आवाज़ कहां से आती है और केवल चुनिंदा लोगों को ही क्यों निशाना बनाती है—यह सवाल आज भी आधुनिक ध्वनि विज्ञान की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेली बना हुआ है.

संदर्भ एवं जर्नल्स (References):

  1. The Journal of the Acoustical Society of America (JASA): The Taos Hum: Low-frequency environmental acoustic measurements and human response. DOI: 10.1121/1.413009
  2. Geophysical Research Letters (AGU): Ocean wave interactions as the source of continuous Earth microseismic hum. DOI: 10.1029/2005GL023533
  3. Mullins, D. H., & Kelly, J. P. (1995): Mystery hums and human auditory sensitivity: Clinical evaluations of low-frequency sound perception. Acoustical Bulletin.

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