Voynich Manuscript: रहस्यमयी किताब, जिसे कोई न पढ़ सका

Voynich Manuscript: रहस्यमयी किताब, जिसे कोई न पढ़ सका

येल यूनिवर्सिटी की दुर्लभ पुस्तकों की लाइब्रेरी (Beinecke Rare Book Library) के एक तहखाने में मखमली बक्से के भीतर 240 पन्नों की एक ऐसी किताब रखी है, जिसने दुनिया के सबसे बड़े कोड-ब्रेकर्स, कंप्यूटर वैज्ञानिकों और भाषाविदों की नींद उड़ा रखी है.

किताब का नाम है—वॉयनिच पांडुलिपि (The Voynich Manuscript).

इस किताब में ऐसे पौधे चित्रित हैं जो धरती पर कहीं नहीं उगते, ऐसी खगोलीय आकृतियां हैं जो जाने-पहचाने तारों से मेल नहीं खातीं, और एक ऐसी अज्ञात भाषा लिखी गई है जिसे आज तक दुनिया का कोई इंसान या सुपरकंप्यूटर डिकोड नहीं कर पाया.

1912 की वो अजीब खोज

साल 1912 में पोलिश-अमेरिकी प्राचीन पुस्तकों के सौदागर विल्फ्रिड वॉयनिच ने रोम के पास एक जेसुइट कॉलेज से कुछ पुरानी पांडुलिपियाँ खरीदीं. उसी ढेर में से निकली एक अजीबोगरीब जिल्द वाली किताब, जिसके पन्नों पर इंसानी इतिहास की सबसे अबूझ पहेली दर्ज थी.

शुरुआत में इतिहासकारों को लगा कि यह किसी ठग का बनाया हुआ मज़ाक या फर्जीवाड़ा है. लेकिन 2009 में जब एरिज़ोना विश्वविद्यालय ने इसके पन्नों (Vellum – बछड़े की खाल से बना कागज़) की कार्बन डेटिंग (Carbon-14 Dating) की, तो वैज्ञानिक चौंक गए. यह किताब 1404 से 1438 ईस्वी के बीच लिखी गई थी—यानी पुनर्जागरण काल (Renaissance) की शुरुआत में. यह कोई आधुनिक फर्जीवाड़ा नहीं था.

किताब के भीतर क्या छिपा है?

पांडुलिपि को मोटे तौर पर पांच हिस्सों में बांटा गया है:

  1. हर्बल (वनस्पति विज्ञान): 113 ऐसे पौधों के बारीक और रंगीन चित्र, जिनका वनस्पति शास्त्र के किसी भी रिकॉर्ड में नामोनिशान नहीं है.
  2. खगोल विज्ञान: तारों, राशियों और ग्रहों के गोलाकार चार्ट्स, जिनमें कुछ पैटर्न ऐसे हैं जो बिना आधुनिक टेलीस्कोप के उस दौर में देखे ही नहीं जा सकते थे.
  3. जैविक और चिकित्सीय: जटिल नलियों और हौज में स्नान करती हुई महिलाओं के विचित्र चित्र, जो मानव शरीर रचना या शायद किसी एल्केमी (कीमिया) के गुप्त फॉर्मूले की ओर इशारा करते हैं.
  4. फार्मास्यूटिकल: विचित्र जड़ों, पत्तियों और दवाइयों के जार के रेखाचित्र.
  5. रेसिपीज: छोटे-छोटे पैराग्राफ्स, जिनके आगे तारे के निशान बने हैं—मानो कोई गुप्त तांत्रिक या रासायनिक विधियां लिखी गई हों.

एलियन भाषा या जिपफ़ का नियम?

वॉयनिच की भाषा में लगभग 25 से 30 अलग-अलग वर्ण (Letters) हैं, जो बाएं से दाएं बहुत ही धाराप्रवाह तरीके से लिखे गए हैं. पूरी किताब में कहीं भी कोई गलती काटकर सुधारी नहीं गई है, मानो लिखने वाले के दिमाग में यह भाषा पानी की तरह बह रही थी.

भाषाविदों ने जब इस पर आधुनिक एल्गोरिदम चलाए, तो पाया कि यह ‘जिपफ़ के नियम’ (Zipf’s Law) का पूरी तरह पालन करती है. जिपफ़ का नियम प्राकृतिक मानव भाषाओं (जैसे हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत) में शब्दों की आवृत्ति (Frequency) को तय करता है. इसका मतलब साफ़ था—यह कोई मनगढ़ंत रैंडम अक्षर नहीं हैं, यह एक वास्तविक, जीवित और बेहद जटिल भाषा या कोड है.

द्वितीय विश्व युद्ध में हिटलर के ‘एनिग्मा कोड’ को तोड़ने वाले महान कोड-ब्रेकर विलियम एफ. फ्रीडमैन ने अपनी ज़िंदगी के कई साल इसे पढ़ने में बिता दिए, लेकिन अंत में उन्होंने भी हार मान ली.

क्या यह किसी विलुप्त हो चुकी गुप्त सभ्यता की भाषा है? किसी कीमियागर (Alchemist) की डायरी? या फिर एक ऐसा कूटलेखन जिसका ताला केवल उसे लिखने वाला ही खोल सकता था? वॉयनिच आज भी खामोशी से अपनी पहेली के साथ मुस्कुरा रही है.

प्राथमिक संदर्भ एवं जर्नल्स (References):

  1. Hodgins, G. W. L. (2012). Accelerating radiocarbon dating of the Voynich Manuscript. University of Arizona Physics and AMS Laboratory Report.
  2. Amancio, D. R. (2013). Probing the enigma of the Voynich Manuscript for natural language features. PLOS ONE, 8(7), e67344. DOI: 10.1371/journal.pone.0067344
  3. Montemurro, M. A., & Zanette, D. H. (2013). Keywords and co-occurrence patterns in the Voynich Manuscript: An information-theoretic analysis. PLOS ONE, 8(6), e66344. DOI: 10.1371/journal.pone.0066344

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